sanatan
Friday, 4 March 2016
Monday, 13 April 2015
कौन कहता है की चाणक्य बिना चन्द्रगुप्त नहीं बन सकता
इसके लिए थोड़ा जूनून जगाना पड़ता
और लक्ष्य के प्रति समर्पण की अग्नि में खुद को जलाना पड़ता
इसके लिए थोड़ा साहस अपने अंदर लाना पड़ता है
लोहे की तरह आदर्शो की अग्नि में खुद को जलाना पड़ता है
याद रहे विजयश्री उसकी नहीं होती जो
दूध की तरह स्थिर रहना चाहता है
विजयश्री उसकी होती है जो
दूध से घी बनकर
घी की तरह जलना जनता है
( दूध सिर्फ एक व्यक्ति को स्वस्थ रख सकता है। मगर उसी दूध से बना घी जब जलता है
तो उससे न केवल अंधकार दूर होता है ब्लकि उसके जलने से आस पास का पर्यावरण भी शुद्ध होता है )
इसके लिए थोड़ा जूनून जगाना पड़ता
और लक्ष्य के प्रति समर्पण की अग्नि में खुद को जलाना पड़ता
इसके लिए थोड़ा साहस अपने अंदर लाना पड़ता है
लोहे की तरह आदर्शो की अग्नि में खुद को जलाना पड़ता है
याद रहे विजयश्री उसकी नहीं होती जो
दूध की तरह स्थिर रहना चाहता है
विजयश्री उसकी होती है जो
दूध से घी बनकर
घी की तरह जलना जनता है
( दूध सिर्फ एक व्यक्ति को स्वस्थ रख सकता है। मगर उसी दूध से बना घी जब जलता है
तो उससे न केवल अंधकार दूर होता है ब्लकि उसके जलने से आस पास का पर्यावरण भी शुद्ध होता है )
Thursday, 9 April 2015
पंचपरमेश्वर और पंचतत्व में समानता क्या है
१. पंचपरमेश्वर में प्रथम शिव है जो सदा सत्य है द्वितीय विष्णु जो सदा संरक्षक है
तृतीय ब्रम्हा जो श्रिस्टी कर्ता है।
ठीक उसी प्रकार पंचतत्व में प्रथम अग्नि, द्वितीय वायु, तृतीय आकाश
इन तीनो की एक विशेषता है ये है तो मगर दिखाई नहीं देते। मगर होते है ,
अगर ध्यान दिया जाए तो महसूस जरूर किया जा सकता है।
२ इन तीन परमेश्वर के अलावा दो परमेश्वर और भी है माँ -बाप
ठीक उसी प्रकार जैसे हमारे पंचतत्व में जल और पृथ्वी
इन दोनों में भी एक विशेषता है ये है भी इन्हे देख भी सकते है।
इन्हे महसूस भी कर सकते है।
पंचपरमेश्वर और पंचतत्व में एक अन्तर है।
जिनमे एक तो सत्य है जबकी दूसरा भ्रम
एक तो जीवन का कारण है मगर दूसरा शरीर की आवशयकता है।
मगर अफ़सोस लोग जीवन के कारण को नहीं जानते बस शरीर की आवश्यकता
की पूर्ति पर ध्यान देते है।
१. पंचपरमेश्वर में प्रथम शिव है जो सदा सत्य है द्वितीय विष्णु जो सदा संरक्षक है
तृतीय ब्रम्हा जो श्रिस्टी कर्ता है।
ठीक उसी प्रकार पंचतत्व में प्रथम अग्नि, द्वितीय वायु, तृतीय आकाश
इन तीनो की एक विशेषता है ये है तो मगर दिखाई नहीं देते। मगर होते है ,
अगर ध्यान दिया जाए तो महसूस जरूर किया जा सकता है।
२ इन तीन परमेश्वर के अलावा दो परमेश्वर और भी है माँ -बाप
ठीक उसी प्रकार जैसे हमारे पंचतत्व में जल और पृथ्वी
इन दोनों में भी एक विशेषता है ये है भी इन्हे देख भी सकते है।
इन्हे महसूस भी कर सकते है।
पंचपरमेश्वर और पंचतत्व में एक अन्तर है।
जिनमे एक तो सत्य है जबकी दूसरा भ्रम
एक तो जीवन का कारण है मगर दूसरा शरीर की आवशयकता है।
मगर अफ़सोस लोग जीवन के कारण को नहीं जानते बस शरीर की आवश्यकता
की पूर्ति पर ध्यान देते है।
Wednesday, 18 March 2015
इन्सानियत
चलो बनाए अब नई दुनिया को जहाँ सबका इन्सानियत-ए -धर्म होगा
जहाँ ना होगा हिन्दु -मुस्लिम ना यहुदी -ईसाई होगा
होगा तो सिर्फ एक धर्म जिसका नाम इन्सानियत -ए -धर्म होगा
जब होगा सिर्फ एक धर्म तो न तो किसीका धर्मांतरण होगा
चलो बनाए नई दुनिया को .............
आज भी तो नहीं हम साथ -साथ ,फिर अनजान है जो इस दुनिया से
उनके कल का क्या होगा
मिटा देनी चाहिए वो सारी धर्मो की त्रुटी जिनसे इन्सानियत में कोई विघ्न होगा
चलो बनाए अब नई दुनिया को.……
जहाँ ना होगी कोई ऊँच -नीच ना कोई अन्धविश्वास होगा
होगा तो सिर्फ प्रत्यक्ष कर्म जिसका उपभोक्ता स्वॅम होगा
चलो बनाए नई दुनिया को.……………
जहाँ न होगी राष्ट्रों की सीमा , फिर न सीमा पर बंदा होगा
तो फिर नहीं रोएगी किसी की माँ जब उनका बेटा न जुदा होगा
चलो बनाए नई दुनिया को...........
जहाँ न होगा प्राकृति का शोषण ऐसा सबका उपभोग होगा
अगर ऐसा नहीं किया हमने तो इसका परिणाम बुरा होगा
रोती रहेगी एक तरफ इन्सानियत और एक तरफ धर्म पड़ा होगा
चलो बनाए नई दुनिया को जहा सबका धर्म इन्सानियत -ए -धर्म होगा
फिर आओ करे इंसानियत का मिलकर संकल्प
और बन जाए विश्व इतिहास के स्वर्णिम भविष्य का नया बिकल्प
केहरी सिंह
चलो बनाए अब नई दुनिया को जहाँ सबका इन्सानियत-ए -धर्म होगा
जहाँ ना होगा हिन्दु -मुस्लिम ना यहुदी -ईसाई होगा
होगा तो सिर्फ एक धर्म जिसका नाम इन्सानियत -ए -धर्म होगा
जब होगा सिर्फ एक धर्म तो न तो किसीका धर्मांतरण होगा
चलो बनाए नई दुनिया को .............
आज भी तो नहीं हम साथ -साथ ,फिर अनजान है जो इस दुनिया से
उनके कल का क्या होगा
मिटा देनी चाहिए वो सारी धर्मो की त्रुटी जिनसे इन्सानियत में कोई विघ्न होगा
चलो बनाए अब नई दुनिया को.……
जहाँ ना होगी कोई ऊँच -नीच ना कोई अन्धविश्वास होगा
होगा तो सिर्फ प्रत्यक्ष कर्म जिसका उपभोक्ता स्वॅम होगा
चलो बनाए नई दुनिया को.……………
जहाँ न होगी राष्ट्रों की सीमा , फिर न सीमा पर बंदा होगा
तो फिर नहीं रोएगी किसी की माँ जब उनका बेटा न जुदा होगा
चलो बनाए नई दुनिया को...........
जहाँ न होगा प्राकृति का शोषण ऐसा सबका उपभोग होगा
अगर ऐसा नहीं किया हमने तो इसका परिणाम बुरा होगा
रोती रहेगी एक तरफ इन्सानियत और एक तरफ धर्म पड़ा होगा
चलो बनाए नई दुनिया को जहा सबका धर्म इन्सानियत -ए -धर्म होगा
फिर आओ करे इंसानियत का मिलकर संकल्प
और बन जाए विश्व इतिहास के स्वर्णिम भविष्य का नया बिकल्प
केहरी सिंह
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