Monday, 13 April 2015

               कौन कहता है की चाणक्य बिना चन्द्रगुप्त नहीं बन सकता
                     इसके लिए थोड़ा जूनून जगाना पड़ता
          और लक्ष्य के प्रति समर्पण की अग्नि में खुद को जलाना पड़ता
                 इसके लिए थोड़ा साहस अपने अंदर लाना पड़ता है
           लोहे की तरह आदर्शो की अग्नि में खुद को जलाना पड़ता है


                   याद रहे विजयश्री उसकी नहीं होती जो
                     दूध की तरह स्थिर रहना चाहता है
                     विजयश्री उसकी होती है जो
                          दूध से घी बनकर
                       घी की तरह जलना जनता है


( दूध सिर्फ एक व्यक्ति को स्वस्थ रख सकता है। मगर उसी दूध से बना घी जब जलता है
  तो उससे न केवल  अंधकार दूर होता है ब्लकि  उसके जलने से  आस पास का पर्यावरण भी शुद्ध होता  है )

Thursday, 9 April 2015

पंचपरमेश्वर और पंचतत्व में समानता क्या है
१. पंचपरमेश्वर में प्रथम शिव है जो सदा सत्य है द्वितीय विष्णु जो सदा संरक्षक है
   तृतीय ब्रम्हा जो श्रिस्टी कर्ता है।
ठीक उसी प्रकार पंचतत्व में प्रथम अग्नि, द्वितीय वायु, तृतीय आकाश
इन तीनो की एक विशेषता है ये है तो मगर दिखाई नहीं देते। मगर होते है ,
अगर ध्यान दिया जाए तो महसूस जरूर किया जा सकता है।
२ इन तीन परमेश्वर के अलावा दो परमेश्वर और भी है माँ -बाप
  ठीक उसी प्रकार जैसे हमारे पंचतत्व में जल और पृथ्वी
इन दोनों में  भी एक विशेषता है ये है भी इन्हे देख भी सकते है।
इन्हे महसूस भी कर सकते है।
पंचपरमेश्वर और पंचतत्व में एक अन्तर है।
जिनमे एक तो सत्य है जबकी दूसरा भ्रम
एक तो जीवन का कारण है मगर दूसरा शरीर की आवशयकता है।
मगर अफ़सोस लोग जीवन के कारण को नहीं जानते बस शरीर की आवश्यकता
की पूर्ति पर  ध्यान देते है।